मोतिहारी। बिहार में सोशल मीडिया के जरिए उन्माद फैलाने और भ्रामक खबरें साझा करने वालों पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मोतिहारी पुलिस ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भड़काऊ सामग्री पोस्ट कर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वाले कई तत्वों को चिन्हित किया है। पुलिस की यह कार्रवाई हाल ही में हुई एक घटना के बाद माहौल को शांत रखने और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की जा रही है।


डिजिटल उपद्रवियों पर पुलिस का प्रहार: भड़काऊ पोस्ट और वीडियो बनाने वालों पर FIR

मोतिहारी के पंचपकड़ी थाना क्षेत्र में 4 मई को एक धार्मिक यात्रा के दौरान दो पक्षों में हुए विवाद के बाद, अब कुछ लोग सोशल मीडिया का सहारा लेकर आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। साइबर सेल की गहन निगरानी में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहाँ तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।

भ्रामक वीडियो के जरिए तनाव फैलाने की कोशिश

पुलिस जांच में एक यूट्यूबर, कृष्णा कुमार, का नाम सामने आया है। आरोप है कि उन्होंने फेसबुक पर कलश यात्रा विवाद से जुड़ा एक ऐसा वीडियो साझा किया, जिसमें संपादन (Editing) के जरिए सच्चाई को छिपाया गया था। पुलिस के अनुसार, इस वीडियो का उद्देश्य दो समुदायों के बीच आक्रोश पैदा करना था। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

आपत्तिजनक पोस्ट और धमकी भरे संदेश

सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणी और धमकियों के दो अन्य गंभीर मामले भी दर्ज किए गए हैं:

  • विवादित टिप्पणी: बजरंग दल से जुड़े सचिन कुमार पर फेसबुक पर एक समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक और अश्लील वीडियो साझा करने का आरोप है। स्थानीय पुलिस ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

  • जान से मारने की धमकी: इंस्टाग्राम के जरिए ढाका प्रखंड के एक पदाधिकारी को जान से मारने की धमकी देने का मामला भी प्रकाश में आया है। आरोपी युवक विवाद थमने के बाद भी सोशल मीडिया पर धमकियां देकर माहौल को तनावपूर्ण बनाने की कोशिश कर रहा था।


प्रशासन की अपील: सोशल मीडिया का न करें दुरुपयोग

मोतिहारी एसपी स्वर्ण प्रभात ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि इंटरनेट की दुनिया में बैठकर शांति भंग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। साइबर सेल की टीम 24 घंटे हर संदिग्ध हैंडल और पोस्ट पर नजर रख रही है।

पुलिस की सख्त हिदायत:

  1. किसी भी भ्रामक वीडियो या संदेश को बिना पुष्टि के आगे न भेजें।

  2. धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि का हिस्सा न बनें।

  3. सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की धमकी देना या भड़काऊ टिप्पणी करना गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आ सकता है।